
भई अपने सचिन तेंदुलकर के क्या कहने। उनके बारे में क्या कहूं और क्या लिखूं। कई बार मन किया। कोशिश की, लेकिन नहीं लिख सका। वह इसलिए कि उनके बारे में क्या लिखूं। जब तक उनके किसी एक रिकॉर्ड के विषय में लिखा जाए, तब तक वे दूसरा रिकॉर्ड बना देते हैं। यह सिलसिला चलता ही रहता है। सच कहूं तो मन भी नहीं करता कि यह सिलसिला कभी बंद हो। जब सचिन ने ग्वालियर के रूपसिंह स्टेडियम में २०० रन बनाए तो चाहा कि लिखूं। लेकिन उससे पहले ही कई महान खेल पत्रकारों, विशेषज्ञों और न जाने किस-किस ने सब कुछ लिख डाला। खूब पढ़ा। जमकर पढ़ा। सोचता रहा कि मैं क्या लिखूं। कुछ समझ नहीं आया, तो यह विचार त्याग दिया। लेकिन क्या कहने। जब इतिहास लिखा गया तब मैं अंबाला में था, लेकिन कुछ समय बाद ही उस शहर में आ गया, जहां इतिहास रचा गया। अमर ग्वालियर और अमर रूपसिंह स्टेडियम। क्या कहने।
यहां आकर पता चला कि जब सचिन ने ग्वालियर के रूपसिंह स्टेडियम में नाबाद २०० रन बनाए थे तब से यहां के नगर निगम में एक प्रस्ताव लंबित था। उनके नाम से किसी मार्ग का नाम रखने का प्रस्ताव। वही प्रस्ताव गत दिनों नगर निगम परिषद की बैठक में पारित हो गया। यहां की पुरानी हुरावली रोड अब सचिन तेंदुलकर के नाम से जानी जाएगी। बैठक में इसके साथ ही एक निर्णय और लिया गया। रूपसिंह स्टेडियम की एक पवेलियन का नाम भी सचिन तेंदुलकर पवेलियन हो गया है। यह मई माह की परिषद की पहली बैठक थी। क्या कहने। भई वाह। आप क्या कहते हैं। मैं भी तो जानूं।