
आखिरकार 15 साल बाद फिर वह दिन आ ही गया जब भारत क्रिकेट के मामले में एक बार फिर एशिया का सिरमौर बन गया। क्रिकेट प्रेमी तो इस जीत से खुश हैं ही पर सबसे ज्यादा खुशी कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को होगी। धोनी इस बार बाल-बाल बच गए। एशिया कप फाइनल में हारने का मतलब धोनी की कप्तानी से विदायी भी हो सकती थी। जीत के बाद अब कुछ समय के लिए तो उन पर अंगुली नहीं ही उठेगी। यह भी दीगर है कि इस जीत में धोनी का कुछ खास योगदान नहीं रहा। उन्होंने फाइनल में 50 गेंद में 38 रन बनाए, जिसे केवल ठीक ठाक ही कहा जा सकता है, अगर बात एक दिनी मैच की हो तो।
मैं बार-बार और हर बार यही कहता रहा हूं कि धोनी किस्सत के धनी हैं और इस बार भी यही साबित हुआ। धोनी इस बात से तो खुश होंगे ही कि उन्होंने अपनी कप्तानी में 15 साल का सूखा समाप्त किया साथ ही उनकी खुशी का एक कारण और होगा वह हैं सचिन तेंदुलकर। यह टूर्नामेंट उन्होंने सचिन की गैर मौजूदगी में जीता है। एक समय था जब भारतीय क्रिकेट के बारे मेें कहा जाने लगा था कि सचिन के बगैर टीम नहीं जीतती। धोनी जबसे कप्तान बने हैं उनकी कोशिश रही है कि इस टैग से बचा जाए।
अब जरा यह समझने की कोशिश करते हैं कि धोनी की कप्तानी पर खतरा आखिर था क्यों। दरअसल उनकी कप्तानी काफी समय से खतरे में थी, पर वेस्टइंडीज में खेले गए टी-ट्वेंटी विश्व कप से जल्दी विदायी ने आग में घी का काम किया। जिन कारणों से धोनी को कप्तान बनाया गया था वही काफी समय से धोनी में देखने को नहीं मिल रहे थे। उनकी सबसे बड़ी समस्या यही थी कि जो रणनीति वे बनाते थे उसे मैदान में क्रियान्वित नहीं कर पा रहे थे और जब रणनीति मैदान में नहीं चलेगी तो उसका फायदा क्या ? अपनी बल्लेबाजी की तरह कप्तानी में भी जो आक्रामकता धोनी में दिखती थी वह अब न तो उनकी बल्लेबाजी में देखने को मिल रही है और न ही मैदान पर कप्तानी करते समय। कैप्टन कूल कहे जाने वाले धोनी अक्सर मैदान पर गर्म होते हुए भी दिखे हैं। इसका कारण कई वरिष्ठ खिलाडिय़ों का टीम में होना माना जा सकता है। यह बात सही है कि वरिष्ठों की मौजूदगी में कप्तानी करना किसी के लिए भी आसान नहीं होता और धोनी भी इससे दो चार हो रहे हैं। काबलियत इसी में है कि वरिष्ठों को पूरा सम्मान देकर भी उन्हें अच्छा खेल खेलने के प्रोत्साहित किया जाए।
२३ जून को फाइनल के रिहर्सल के तौर पर खेले गए मैच में जब पूरी टीम 209 रन बनाकर आउट हो गई तो लगा कि शायद इस बार भी कप हाथ से जाता रहेगा, लेकिन तारीफ करनी होगी दिनेश कार्तिक की जिन्होंने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए 66 रन बनाए। हालांकि, उन्होंने इतने रन बनाने के लिए 126 गेंदें खेलीं। गेंदबाजी में नेहरा ने कमाल का प्रदर्शन किया और नौ ही ओवर में चार विकेट ले लिए। धोनी की कप्तानी में भारत ने अभी तक किसी टूर्नामेंट में 7 बार फाइनल मुकाबला खेला और उसमें से यह भारत की चौथी जीत है।
उम्मीद की जानी चाहिए कि इस जीत के साथ ही धोनी एक नई शुरुआत करेंगे। जो क्षमताएं उनमें हैं उसका इस्तेमाल जरूरत पडऩे पर करेंगे, जिससे फिर उनकी कप्तानी पर सवाल न उठें।