बुधवार, मार्च 10, 2010

सूरत तो बदलनी ही चाहिए

आखिर वही हुआ, जिसकी सबको उम्मीद थी। जो सभी चाहते थे और सबसे बडी बात जो होना चाहिए था। मिल ही गया महिलाओं को आरक्षण। हालांकि अभी तो पहला और नन्हा सा कदम है। रास्ता लम्बा है। लेकिन हर सफर की शुरूआत पहले ही कदम से होती है। उम्मीद है कदम कदम यह अधिनियम भी अपनी मंजिल पा ही लेगा। संभव है इससे महिलाओं की हालत में सुधार आए। उनका जीवन खुशहाल बन जाए।
आरक्षण के विरोधियों ने अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोडी। उनका बस चलता तो ये दिन नहीं आता। हालांकि इसको गलत कहना भी अपने आप में गलत ही होगा। विरोधी आरक्षण के इस प्रारूप में परिवर्तन की मांग कर रहे थे जो कहीं से भी गलत नहीं था। उनकी अपनी सोच थी।
बहरहाल अधिनियम ने पहली बाधा पार कर ली है। अब सवाल यह है कि क्या इससे सि्थति में कोई परिवर्तन आएगा। महिला दिवस पर कई राष्टीय अखबारों ने कई ताकतवर महिलाओं के बारे में छापा। अच्छा है। आजादी के बाद महिलओं की सि्थति में काफी बदलाव आया है इसे नकारा नहीं जा सकता। लेकिन यह सिक्के का सिर्फ एक ही पहलू है। भले ही महिला सशकि्तकरण जमकर हुआ हो लेकिन हालात उस तरह नहीं बदले जैसे बदलने चाहिए थे। महिला उत्पीडन रोकने के लिए दहेज निषेध कानून बनाया गया लेकिन उसका कितना सही उपयोग हो रहा है और कितना गलत सब जानते हैं। जो इसका सही उपयोग करते हैं वह भी और जो गलत उपयोग करते हैं वह भी। सबको शिक्षा का अधिकार लाया गया लेकिन यह जानकर हैरत होती है कि इस सब के बाद भी 39 फीसदी महिलाएं प्राथमिक स्कूलों का मुंह तक नहीं देख पातीं। माता पिता उन्हें स्कूल नहीं भेजते। क्यों क्योंकि अगर वे स्कूल जाएंगी तो घर का काम कौन करेगा। महिलाओं को अभी भी भोजन तब करतीं हैं जब घर के पुरूष भर पेट भोजन कर लेते है। अब कैसे सुधरेगा महिलओं का स्वास्थ्य और कैसे मिलेगी उन्हें शिक्षा।
गांवों में अभी भी जहां कहीं भी महिला प्रधान हैं वहां काम कौन करता है वह भी सब जानते हैं। यही नहीं जब राबडी देवी बिहार की मुख्यमंत्री थीं तो असली मुख्यमंत्री कौन था। आरक्षण मिले अच्छी बात है लेकिन सही मायने में। तभी आरक्षण के मायने हैं नहीं तो कौन जाने क्या होगा।

4 टिप्‍पणियां:

Jack ने कहा…

सही कहा आपने ...महिलाओं के प्रति समपर्पित मेरा भी एक पोस्ट है जो वाकई आपको पसंद http://bit.ly/9Ctt9K

jugal ने कहा…

महिला आरक्षण के बारे में फिलहाल कुछ कहना मेरी समझ से जल्दबाजी ही होगी। क्योंकि अभी इसे मूरत रूप देने के मामले में कसर बाकी है।

Suman ने कहा…

nice

mithilesh ने कहा…

dost Aap ka womensempower par likha blog padha.aap ne bahoot sahi likha hai.lekin ak bat par aap duvidha me hai ki kahi is bill ka bhi vahi hars na ho jay jo dahej bill ka huaa hai ya any bill ka. dost mai aap ko batana chaahata hu nathing is batter than samthing. dost abhi to sirf ak kadam badha hai dekho aage hota hai kya.prem se bolo jai mataye...jai mahilaye

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