गुरुवार, अप्रैल 29, 2010

खेल क्रिकेट का



क्रिकेट का एक और संग्राम शुरू होने वाला है। मैं यहां महासंग्राम इसलिए नहीं लिख रहा क्योंकि अक्सर अखबार के पेजों के ऊपर जो लोगो लगाए जाते हैं, उनमें क्रिकेट का महासंग्राम ही लिखा होता है। चुनाव हों तो भी महासंग्राम और क्रिकेट हो तो भी महासंग्राम एेसा लगता है जैसे संग्राम तो कोई शब्द रह ही नहीं गया है जो है सो महासंग्राम ही है। जैसे कार्रवाई कोई शब्द नहीं रह गया जब तक उसमें सख्त और कड़ी न जुड़े बात बनती ही नहीं।
खैर, पूरा देश एक बार फिर क्रिकेट के खुमार में डुबने वाला है। विश्व इसलिए नहीं लिखा क्योंकि कुछ सीमित देश ही इसमें शिरकत करते हैं। अगर बात फुटबाल की होती तो शायद विश्व शब्द का इस्तेमाल किया जा सकता था।
अब बात मुद्दे की बात। इस ब्लॉग पर मुद्दत के बाद। आईपीएल जिस खुशनुमा माहौल में शुरू हुआ उतने ही तनाव भरे माहौल में इसका समापन हुआ। अब ट्वेंटी-ट्वेंटी जितनी मुश्किल दौर में शुरू हो रहा है उम्मीद की जानी चाहिए कि इसके विपरीत यह खुशनुमा माहौल में समाप्त हो। टूर्नामेंट अभी शुरू भी नहीं हुआ कि लोगों ने इसके विजेता को लेकर भविष्यवाणी करनी शुरू कर दी है। कोई भारत को विजेता बना रहा है तो कोई पाकिस्तान को। जितने लोग उतने विजेता। ये वे लोग हैं जो जानते हैं कि क्रिकेट में भविष्यवाणी करना खतरे से खाली नहीं होता लेकिन आदत से मजबूर जो हैं। एक मैच की भविष्यवाणी भी खतरनाक होती है तो फिर प्रतियोगिता शुरू होने से पहले उसके विजेता के बारे में कयास कैसे लगाए जा सकते हैं। समझना मुश्किल है। शायद भविष्यवाणी करने वाले अपनी विद्वता भी दिखाना चाहते हैं। सबकी अपनी अपनी दुकान अपना अपना काम। दुकान भी तो चलानी है न भाई। सब जानते हैं कि क्रिकेट में वही टीम जीतती है मैच के दिन अच्छा खेलती है। तो मेरा मानना है कि जो टीम लगातार अच्छा खेलेगी वही विजेता बनेगी। वो कोई भी हो सकता है।
खेल बस शुरू ही होने वाला है। इसलिए मैं भी ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा। हालांकि समय समय पर यहां अपनी बात जरूर रखता रहूंगा। आपसे गुजारिश है कि बात अच्छी लगे तो भी और खराब लगे तो भी अपनी टिप्पणी अवश्य करें। बाकी आपकी मर्जी।

5 टिप्‍पणियां:

PKSingh ने कहा…

...बहुत अच्छा लिखा है आपने धन्यवाद! इस पोस्ट के लिए आगे भी लिखते रहे

falsafa ने कहा…

भाई साहब, अब तो इतने मैच होने लगे हैं कि इस वल्र्ड कप का भी क्रेज नहीं रहा। अधिकता किसी भी चीज की अच्छी नहीं होती। यदि भद्रजनों के खेल की आड़ में सफेदपोश लोग यूं ही काली कमाई करेंगे तो क्रिकेट देखना-सुनना भी बंद हो जाएगा। वैसे आपको लेखन के लिए बधाई। अपना बहुमूल्य समय निकालकर ब्लॉग पर पधारते रहा करिए। अच्छा लगता है। वैसे पिछले कुछ दिनों से आप कहां गुम हैं। आपका मोबाइल बंद है क्या? यदि नंबर बदल लिया हो तो कृपया अपना नया नंबर बता दें, आपकी कृपा होगी।

lokendra singh rajput ने कहा…

सही कहा दोस्त....... कुछ शब्दों की हमने बाट लगा दी है...
जैसे पहले घी अपने आप में पर्याप्त था.. उसके बाद क्या हुआ... देशी घी.... शुद्ध घी... शुद्ध देशी घी...... देशी गाय का शुद्ध घी.....

BINDASS ने कहा…

pyare very good

neeraj ने कहा…

VERY GOOD GURU LAGE RAHO. CHA GAYE.

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