मंगलवार, जनवरी 19, 2010

कितने ईडियट


जब हम हंसने पर उतारू होते हैं तो क्या सब कुछ भूल जाते हैं। अपना देश, अपनी भाषा, अपनी संस्कृति और बडों का सम्मान सब कुछ। अगर मेरी बात पर विश्वास नहीं तो हिन्दी फिल्म के इतिहास में अब तक की सबसे अधिक कमाई करने वाली थ्री ईडियट देखिये। फिल्म अस्वस्थ मनोरंजन से भरपूर है। क्योंकि स्वस्थ मनोरंजन के लिए दिमाग की जरूरत पडती है और राजू हिरानी अपनी फिल्मों में इसका इस्तेमाल नहीं करते। मैं यह तो नहीं कह सकता कि वह उनके पास है नहीं यह तो आप उनकी पिछली फिल्मों के देख कर ही बतायें। अब तक मैं यह समझने की असफल कोशिश कर रहा हूं कि राजू हिरानी और विधू विनोद चोपडा आखिर फिल्म के माध्यम से कहना क्या चाहते हैं। यह ठीक है कि हमारी शिक्षा प्रणाली में कुछ खामियां हैं पर ऐसा भी नहीं है कि सब कुछ गलत ही है। जिन्होंने शिक्षा प्रणाली बनाई वह वेबकूफ ही हैं। ध्यान दें आमिर खान के और उसके साथी जिसका मजाक उडाते रहते हैं और जो हमारी शिक्षा प्रणाली पर भरोसा करता है वह फेल नहीं होता वह भी दूसरा स्थान पाता हूं। मौलिकता अपनी जगह है पर ऐसा भी नहीं है कि बाकी सब गलत है। अगर राजू और विनोद को गलत लगता है तो वह यह क्यों नहीं बताते कि सही क्या है और क्या किया जाना चाहिए। किसी भी चीज का मजाक उडाना या उपहास करना आसान है। लेकिन अगर यह गलत है तो सही क्या है यह कोई नहीं बताता। अगर आपको नहीं पता कि सही क्या है तो गलत बताने के भी अधिकारी आप नहीं रह जाते। राजू ने फिल्म में जो दिखाया है क्या उसको वह सही ठहरा सकते हैं। सीनियर छात्र जूनियरों की अश्लील और भदृदे तरीके से रैगिंग लेते हैं क्या वह सही है। क्या वह सीन राजू या विनोद खुद अपने बच्चों या परिवार की बुजुर्ग महिलाओं के साथ बैठकर देख सकते हैं। प्राचार्य के आफिस से प्रश्न पत्र चुराने का तरीका राजू ने जो दिखाया है क्या राजू ऐसे ही परचा चोरी कर पढ गए। हमारी संस्कृति में शिक्षक का दरजा ईश्वर से भी उपर बताया गया है लेकिन राजू साहब की फिल्म में प्राचार्य की कितनी तौहीन की गई है सबने देखा। हंसी मजाक और पढाई को बोझ की तरह न लेना ठीक है लेकिन गंभीरता से पढाई करने वालों का अपमान कहां तक उचित है। ये तो कुछ सामान्य बातें हैं एक बार तो राजू ने कमाल ही कर दिया। चमत्कार और धन को उन्होंने जिन शब्दों से प्रतिस्थापित किया है उसका तो जवाब ही नहीं। यही नहीं उन शब्दों का लगातार कई बार इस्तेमाल करना क्या दर्शाता है। मैं पत्रकार हूं और लगभग रोज ही रेप आदि खबरें आती हैं लेकिन उन खबरों को बनाते समय कितनी सावधानी बरतनी होती है हर पत्रकार जानता है। जिस दूसरे शब्द का इस्तेमाल राजू बार बार करते है वह शब्द तो हम जल्दी इस्तेमाल ही नहीं करते। सबसे रोचक तथ्य तो उनका इस्तेमाल है। यानी उसके आगे पीछे किन शब्दों को उन्होंने लगाया है यह पटकथा लेखक की संवेदनशीलता को ही दिखाता है। एक गर्भवती महिला की कुछ नौसिखियों से प्रसव करा कर राजू क्या डाक्टरों को नाकार साबित करना चाहते हैं। राजू साहब ने यह भी तरीका बता दिया है कि अपनी मरजी से आप कैसे हवाई जहाज को रुकवा सकते हैं। पता नहीं राजू साहब क्या कहना चाहते हैं। आप की समझ में आ जाए तो बताईयेगा।

6 टिप्‍पणियां:

pukhraj ने कहा…

आपकी समीक्षा में एक चीज अच्‍छी लगी- बलात्‍कार और स्‍तन शब्‍दों का फिल्‍म के बेहद गैर-जिम्‍मेदाराना ढंग से किया गया इस्‍तेमाल. अच्‍छा लगा कि आपने इतनी तीखी भाषा में इसकी आलोचना की. शायद राजकुमार हीरानी और विधु विनोद चौपडा जानते ही नहीं बलात्‍कार का मतलब.
बाकी शिक्षा व्‍यवस्‍था के बारे में आपके विचारों से मैं सहमत नहीं हूं. वास्‍तव में ही हमारे अधिकांश शिक्षक 'वायरस' जैसे हैं और हमारी शिक्षा प्रणाली कचरा है. हमारी शिक्षा का जीवन से कोई संबंध ही नहीं है. खैर इस विषय पर फिर कभी बात होगी.

Udan Tashtari ने कहा…

पुखराज जी की तरह ही सिर्फ फिल्म के उस भाग से जिसमें चमात्कर और धन शब्‍दों का फिल्‍म के बेहद गैर-जिम्‍मेदाराना ढंग से किया, के विषय में आपसे सहमत हूँ.

बाकी तो फिल्म बहुत सधी हुई है और राज कुमार हीरानी और विधु विनोद जैसे सधे हुए परिपक्व फिल्मकारों की सोच और प्रस्तुति सराहनीय है.


खैर, अपना अपना नजरिया.

Arvind Mishra ने कहा…

जब हम फिल्मों को देखने जायं तो बुद्धि को उसी तरह बाहर का रास्ता दिखा दें जैसे मंदिर में जाने के पहले जूते उतार दिए जाते हैं.

ललित शर्मा ने कहा…

हमें तो फ़िल्मे देखे हुए ही बरसों हो गए।
कभी कालेज मे बंक मार कर देखते थे।
बस उसके बाद से बाकी जगत के लिए
"इडियट" ही बने हुए हैं।

बेनामी ने कहा…

are bhai thum be three ediots ka majak hee udda rahe ho.

apke man ke vedna such mein suchhii aur sahi hae,

agar vidhu ko aap apne vedna bhejen toh shayad agli film mein veh in bhaton sj khayal jaroor rakhenge.

maharshi kumar tiwari ने कहा…

kala ko kese sema mae nahe bdhna chahea hamare pules bale bujrgo se kesi bsha usej karte hai usse to film ache hai . ketne amer log dusro ke foto se mix kara kar test fight kara lete hai .koe kuch nahe khta . samecha ache ke thanku.

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