शुक्रवार, फ़रवरी 18, 2011

लो! शुरू हो गया खेल





चार साल के इंतजार के बाद आखिर फिर से विश्वकप शुरू होने वाला है। उद्घाटन कार्यक्रम हो चुका है। अब बारी असली खेल की है, यानी अब होगा बल्ले और गेंद का आमना-सामना। उद्घाटन कार्यक्रम इतना रंगारंग रहा कि मेरी भी दो महीने से अधिक की नींद टूटी और ब्लॉग लेखन फिर से शुरू हो गया। इतने दिनों की चुप्पी तोडऩे का शायद इससे अच्छा मौका हो भी नहीं सकता था।
सबसे पहले तो उन लोगों से माफी मांगना चाहता हूं, जो उस दौरान भी ब्लॉग पर आते रहे जिस समय मैंने कुछ नहीं लिखा। कभी-कभी तो ऐसा भी हुआ कि मैं खुद अपने ब्लॉग पर नहीं आ सका लेकिन लोग आए। हालांकि ऐसे लोग बहुत कम हैं जो मेेरे ब्लॉग पर नियमित या फिर अक्सर आते हैं फिर भी उन सीमित लोगो से ही मैं माफी चाहता हूं और अब यह आशान्वित कराना चाहता हूं कि अब विश्वकप क्रिकेट ही हर खबर इस ब्लॉग के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करूंगा।
अब बात क्रिकेट की। विश्वकप क्रिकेट की। बांग्लादेश की राजधानी ढाका में शानदार कार्यक्रम हुआ। भारतीय उपमहाद्वीप में इससे पहले भी विश्वकप हुए लेकिन बांग्लादेश हर बार इससे महरूम रहा। इस बार उसे विश्वकप की मेजबानी का मौका मिला। इससे बड़ी बात और कोई नहीं हो सकती। भले बांग्लादेश में क्रिकेट का सबसे बड़ा महाकुंभ अब शुरू होने जा रहा हो लेकिन बांग्लादेश की टीम ने क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई है। बांग्लादेश की वह टीम थी, जिससे हार के कारण पिछले साल भारतीय टीम को पहले ही राउंड में टूर्नांमेंट से बाहर होना पड़ा। यही नहीं समय समय पर बांग्लादेश ने कई ऐसे मैच जीते जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। शायद इस बार भी बांग्लादेश कोई ऐसे मैच जीते, जिसके बारे में अभी सिर्फ कयास ही लगाए जा रहे हैं।
पहला मैच भारत और बांग्लादेश के बीच खेला जाएगा। भारत की कोशिश होगी की वह अपना विजयी अभियान यही से शुरू करे वहीं बांग्लादेश पिछली बार की सफलताओं को फिर से दोहराना चाहेगा। अभ्यास मैचों में टीमों ने अपना जलवा दिखाया। भारत ने अपने दोनों मैच जीते और दिखाया कि वह विजेता बनने की प्रबल दावेदार है। हालांकि आस्ट्रलिया अपने दोनों मैच हार गया लेकिन उसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। आस्ट्रेलिया शुरू अपने माइंड गेम के लिए हमेशा से जाना जाता रहा है, हो न हो यह उसी का एक हिस्सा हो। और सबसे बड़ी बात हमें यह नहीं भूलन चाहिए कि आस्टे्रलिया अभी विश्वविजेता है और विश्व की नम्बर एक टीम भी।
भारत को जीत का प्रबल दावेदार माना जा रहा है, इसमें कोई बड़ी बात नहीं। 1983 में जब भारत ने विश्वकप जीता था तब से लेकर अब तक वह प्रबल दावेदार रहा है और इस बार भी है। यह बात अलग है कि वह इस कारनामें को फिर कभी दोहरा नहीं पाया। लेकिन क्या पता इस बार वह हो जाए जो 1983 के बाद नहीं हो सका। पाकिस्तान की बात करें तो उसे भी कप का दावेदार माना जा रहा है, लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप में क्रिकेट हो रहा है लेकिन पाकिस्तान इससे इस बार महरूम हैं इसका असर उस पर दिख रहा है। पाकिस्तान के पक्ष में जो एक बात जा रही है वह यह है कि शाहिद आफरीदी इस टीम के कप्तान हैं। शुएब अख्तर वापसी कर चुके हैं। आफरीदी एक आक्रामक खिलाड़ी तो हैं ही इस बार उन्हें साबित करना होगा कि वह आक्रामक कप्तान भी हैैं। अगर शुरू के दो और इधर तीन विश्वकपों की बात छोड़ दी जाए तो कप उसी टीम ने जीता है जिसके बारे में बहुत कम चर्चा की जा रही थी। तो हो न हो इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिले। इंग्लैंड क्रिकेट का जनक है लेकिन क्रिकेट की सबसे बड़ी प्रतियोगिता का वह कभी विजेता नहीं बन पाया। इस बात का मलााल हर इंग्लैंडवासी को हमेशा रहा है। इस बार इंग्लिश टीम की कोशिश होगी कि वह खिताब पर पहली बार कब्जा कर ले।
खैर यह तो सब कयासों की बात है। खेल शुरू होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है और धीरे-धीरे सारी स्थिति साफ होती जाएगी। मैं एक बार फिर आपको बता दूं कि क्रिकेट विश्वकप की अधिकांश खबरें आपके पास तक पहुंचाने की कोशिश इस ब्लॉग के माध्यम से मैं करूंगा और प्रयास करूंगा कि वह खबरें आप तक पहुंचे जो किसी टीवी चैनल, अखबार या वेबसाइट पर नहीं होती। अगर आप मेरा मार्गदर्शन करेंगे तो अच्छा रहेगा। आप क्या चाहते हैं बताएंगे तो मजा आएगा।
फिलवक्त के लिए इतना ही बाकी अगली पोस्ट में। लो! शुरू हो गया खेल

1 टिप्पणी:

lokendra singh rajput ने कहा…

फिर से ब्लॉग लेखन के लिए बधाई... चलो कुछ मजेदार देखने को मिलेगा और कुछ मजेदार आपके ब्लॉग पर पढने को मिलेगा....

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